Moses story in hindi - मूसा के 18 मुख्य तथ्य

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Moses story in Hindi – मूसा(Musa) के बारे में बाइबल में कुछ इस तरह दिया गया है, कि वह पहला ऐसा जन था जो पैदा होने के तीन महीने बाद छोड़ा गया था। मूसा के माता पिता ने उसे बचाने के लिए उसे नील नदी के किनारे छोड़ दिया क्योंकि उस समय मिस्त्र देश में यह आज्ञा निकली थी कि सभी इब्रानी को जो लड़के थे मार दिया जाए।

Meaning of moses in hindi

1. मूसा का नाम इब्रानी शब्द “मोशे” से आया है, और सबसे ज्यादा यह माना जाता है कि यह नाम मिस्त्र के “मेस” शब्द से लिया गया है जिसका अर्थ बेटा है। लेकिन इसका अर्थ इब्रानी भाषा में समर्पण भी हो सकता है।

2. फिर नील नदी के किनारे मूसा फिरौन की बेटी को मिला और उसने उस बच्चे की देख भाल के लिए उसकी मां को बुलवा लिया पर फिरौन की बेटी को यह नहीं मालूम था कि वह उस बच्चे की मां है।

3. मूसा राजा के परिवार का बच्चा था। उसकी एक बड़ी बहन मरियम और एक बड़ा भाई हारून था।

4. मूसा ने हत्या कर दी थी। उसने देखा कि एक मिस्त्री जन उसके एक इब्री भाई को मार रहा है, तो उसने उसको मार डाला और अपना अपराध छुपाने के लिए उसको बालू में छिपा दिया।

5. फिर मूसा मिस्त्र से भागकर मिद्यान देश में जाकर रहने लगा और वहां जाकर वह एक चरवाहे की बेटी से मिला जिसका नाम सिप्पोरा था। और वह उसके पिता के साथ चरवाहे का काम करने लगा। उसने सिप्पोरा से शादी की जिससे उसके दो बेटे हुए उसने पहले का नाम गेर्शोम रखा और दूसरे का एलिआजर रखा।

6. जब मूसा भेड़ बकरियों को चरा रहा था तब उसने देखा कि कटीली झाड़ियों में आग जल रही है पर झड़ी नहीं जल रही। परमेश्वर ने उसे इस्राइलियों का छुड़नेवाला के रूप में चुना और परमेश्वर ने मूसा से बात की।

7. जब परमेश्वर ने मूसा से बात की तब मूसा ने परमेश्वर को अपनी कमी बताई और कहा मै ठीक से बोल नहीं सकता और मेरी ज़ुबान  लड़खड़ा जाती है।

8. फिर जब मूसा ने परमेश्वर को ये सब बता दिया तो उसने कहा कि मै इस्राइलियों का छुड़ानेवाला नहीं बन सकता तब परमेश्वर ने उसके साथ बोलने के लिए उसके भाई हारून को आज्ञा दी।

9. मूसा 80 साल का था जब उसने इस्राएल के लोगो को मिस्त्र से बाहर निकाला था।

10. मूसा ने परमेश्वर कि ताकत से अपनी छड़ी से तीन बार आश्चर्यकर्म किए पहली बार तब, जब परमेश्वर ने मूसा की छड़ी को सांप में बदल दिया और वह उससे डरकर भाग गया।

11. फिर उसके बाद परमेश्वर ने मूसा से कहा कि वह अपनी हाथ सीने पर रखे और  छिपा ले। जब उसने अपना हाथ बाहर निकाला तब उसका हाथ कोढ़ मै समा गया परन्तु परमेश्वर ने उसे ठीक कर दिया।

12. मूसा ने एक गीत भी लिखा था। यह उसने तब लिखा था जब इस्राइलियों ने लाल समुद्र पार किया था और फिर परमेश्वर ने उसे बंद कर दिया था और मिस्त्र की ताकतवर सेना उसमे डूब कर नाश हो चुकी थी। इसे मूसा का गीत भी कहा जाता है।

13. मूसा ने एक गीत भी लिखा था। यह उसने तब लिखा था जब इस्राइलियों ने लाल समुद्र पार किया था और फिर परमेश्वर ने उसे बंद कर दिया था और मिस्त्र की ताकतवर सेना उसमे डूब कर नाश हो चुकी थी। इसे मूसा का गीत भी कहा जाता है।

14. फिर परमेश्वर ने मूसा को सिनाई पर्वत पर बुलाकर उसे दस आज्ञाएं लिखकर दी । और मूसा ने उन आज्ञाओं का पालन किया पर वैसा ही लोगो को भी सिखाया।

15. तब मूसा ने परमेश्वर के दर्शन को देखा और पैरो के नीचे नीलमणि का चबूतरा सा कुछ देखा पर परमेश्वर ने इस्राइलियों के प्रधानों के पर हाथ नहीं बढ़ाया उसने हारून, नादाब, अबिहू और इस्राइलियों के सत्तर पुरानियो के साथ परमेश्वर को देखा और खाया पिया।

16. परमेश्वर ने उसे पवित्र शास्त्र में सभी मनुष्यों से अधिक विनम्र स्वभाव का व्यक्ति बताया है।

17. मूसा 120 साल का था। उसके जीवन को तीन भागों बांटा जा सकता है। पहला मिस्त्र के राजा के रूप मे, दूसरा चरवाहे के रूप में, और तीसरा इस्राएल के छुड़ाने वाले के रूप में। उसकी मृत्यु के समय उसके पास उसकी पूरी ताकत थी।

18. तब मूसा मोआब देश में मर गया और परमेश्वर ने मूसा को मोआब के देश में बेतपोर के सामने एक तराई में मिट्टी दी और आज के दिन तक कोई नहीं जानता कि मूसा की कब्र कहां है।

यदि मूसा के जीवन की इस झलक ने आपकी रुचि को बढ़ा दिया है तो आप पुराने नियम के सभी विवरणों को निर्गमन, गिनती,और व्यवस्था विवरण को पढ़ सकते है।

आशा करता हु आपको Masihi Zindagi परिवार में आके आपको अच्छा लगा है, और यदि है तोह हमारे साथ अपना अनुभव जरूर साझा करे, जै मसीह की.

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